नई दिल्ली: बढ़ती इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या पर्यावरण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। हालांकि जितनी बढ़ोतरी की हम उम्मीद करते है, उससे कम गति से यह बढ़ोतरी हो रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है इन गाड़ियों की ड्राइविंग रेंज और चार्जिंग स्टेशन की कमी।

हालांकि, इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है जिससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग में बढ़ोतरी होगी। साथ ही जिनके पास पहले से EV है, तो वो भी अब हजारो किलोमीटर का फासला तय कर पाएंगे। आइए जानते है इस खबर के बारे में विस्तृत जानकारी!

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री पिछले कुछ वर्षों से इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर दे रहे हैं। अब उनका मंत्रालय इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए उपयुक्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर काम कर रहा है। उनके मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण के साथ ही एक बैटरी स्वैपिंग स्टेशन को शामिल किया जाए।

७०० जगहों पर होंगे स्टेशन्स 

MoRTH सचिव गिरिधर अरमाने ने इस बारे में विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया की सरकार देश में EV के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए हम राष्ट्रिय स्तर पर चार्जिंग की सुविधा मिले सके इसलिए ७०० स्थानों पर EV चार्जिंग पॉइंट्स लगाने वाले है। साथ ही चार्जिंग में ज्यादा समय लगता है इसलिए हम बैटरी स्वैपिंग मॉडल पर भी काम कर रहे है!

 

बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी

इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी को चार्ज होने में कम से कम 4 से 5 घंटे का समय लगता है। इसलिए केंद्र सरकार बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी पर काम कर रही है। सरकार जल्द ही बैटरी स्वैपिंग नीति को अंतिम रूप देगी ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोगकर्ता अपनी डिस्चार्ज की गई बैटरी को बदल सकें और चार्जिंग यूनिट के साथ स्वैप कर सकें ताकि उन्हें अपने वाहन की बैटरी चार्ज करने के लिए घंटों इंतजार न करना पड़े। नीति आयोग ने बैटरी स्वैपिंग के लिए नीति का मसौदा जारी किया है।

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